
लखनऊ। यूपी के पंचायती राज विभाग मंत्री ओम प्रकाश राजभर एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुखियों में है। कथित तौर पर राजभर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया गया है। एक वायरल वीडियो में राजभर को यह कहते सुना जा सकता है कि उनके पास पावर है और वो तब तक पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे, जब तक पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित नहीं हो जाता।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कह रहे हैं- “जब तक पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चित नहीं जाएगा, तब तक पंचायत चुनाव नहीं होने दूंगा, ये मेरे पास पावर है। बहुत से लोग कह रहे हैं, क्यों नहीं होने दे रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया में कह रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर को प्रधान नहीं बनने देंगे। उनकी औकात नहीं है। जितनी औकात है, उतना ही बोलें। ज्यादा न बोलें। जो तुम्हारे नेता हैं न… वो दिशाहीन हो गए हैं। पहले उनको ठीक करो। हम इतना ही कहेंगे कि विधानसभा चुनाव बाद पंचायत चुनाव का बिगुल बजेगा।”
इस दौरान पंचायती राज विभाग मंत्री ने यह भी दावा किया कि पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के लिए गठित आयोग काम पूरा करने के लिए कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग करेगा। इसके साथ ही प्रधानों के प्रशासक के तौर पर कार्यकाल को 4 महीने और बढ़ाया जाएगा।
राजभर ने कहा, “जा रहा आयोग हाईकोर्ट, वो कहेगा कि हम 50 जिले का काम कर चुके हैं अभी 25 जिले का बाकी है। मुझे टाइम दीजिये तीन महीने का। तो इसमें ओम प्रकाश राजभर क्या करेंगे? कुछ नहीं कर पाएंगे। हम शुरू से ही कह रहे हैं (पंचायत चुनाव) करा लो। तीन महीने में चुनाव कराने का आदेश कोर्ट का है। अभी मैं कल ही दस्तखत करके आया हूं फाइल गयी मुख्यमंत्री के यहां… प्रशासकों का कार्यकाल का बढ़ाने का काम 24 (नवंबर) तारीख तक ही था। फिर चार महीने कार्यकाल बढ़ने जा रहा है। मजा लें प्रधान जी लोग।”



