उत्तर प्रदेशस्वास्थ्य

यूपी में अब दवाओं पर मनमाने मुनाफे का खेल होगा बंद, मिनटों में पता चलेगी असली कीमत

लखनऊ। यूपी के निजी अस्पतालों व खुदरा बाजार में दवाओं के खरीद मूल्य और मरीजों को बेचे जाने वाले बिक्री मूल्य के बीच भारी अंतर देखने को मिला था। जिसकी शिकायतें सामने आने के बाद यूपी खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। जिसके बाद मनमाने मुनाफे का खेल बंद होने वाला है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार अब राज्य की सभी खुदरा दवा दुकानों और अस्पताल परिसरों में चल रही फार्मेसियों को अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर दवाओं का पूरा मूल्य विवरण सार्वजनिक करना होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता लाना और मरीजों को ओवरचार्जिंग से बचाना है। FSDA ने महंगी दवाओं के खेल को रोकने और दवाओं के मनमाने दामों को काबू करने के लिए नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है।

FSDA आयुक्त रोशन जैकब ने मांग की है कि दवाओं की खरीद लागत से अत्यधिक अधिक कीमतों पर लगाम लगाने के लिए देशभर में ट्रेड मार्जिन कैपिंग लागू की जाए। आयुक्त ने औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO)-2013 के नियमों का हवाला देते हुए दवाओं के दामों में पूर्ण पारदर्शिता लाने का आग्रह किया है ताकि मरीजों का शोषण बंद हो सके।

खासकर अस्पताल परिसरों में संचालित ऐसी फार्मेसियां, जहां मरीजों और उनके परिजनों के पास दवा, मेडिकल इक्विपमेंट या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट खरीदने का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता, उनके लिए नियम बेहद सख्त किए गए हैं। औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश -2013 के प्रस्तर 25 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि दवा विक्रेताओं को मैन्युफैक्चरर या इंपोर्टर से प्राप्त प्राइस लिस्ट सार्वजनिक करना अनिवार्य है। लिहाजा, फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट पर दवा निर्माता का नाम, ब्रांड नेम, जेनेरिक नाम, अस्पताल के लिए खरीद दर और मरीज के लिए बिक्री दर स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। एफएसडीए का मानना है कि खरीद मूल्य और एमआरपी में अत्यधिक अंतर होने पर दवा के घटिया, नकली या मिलावटी होने का संदेह रहता है, जिस पर इस व्यवस्था से अंकुश लगेगा।

पारदर्शिता को शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने के लिए वेबसाइट के होमपेज और फार्मेसी परिसर के लिए जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उनमें फार्मेसी या अस्पताल की ओर से नियुक्त फार्मासिस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर और फोटो वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर लगाना जरूरी होगा। फार्मेसी का पूरा नाम, लाइसेंस संख्या, लाइसेंस होल्डर का नाम और रजिस्टर्ड परिसर का पता सार्वजनिक रहेगा। इसके अलावा, हर फार्मेसी को अपने पास उपलब्ध दवाओं के स्टॉक की जानकारी हर सप्ताह अपनी वेबसाइट पर अपडेट करनी होगी।

FSDA ने दवा दुकानों और अस्पताल फार्मेसी काउंटरों पर क्यूआर कोड या मोबाइल ऐप का लिंक प्रमुखता से प्रदर्शित करने के सख्त निर्देश दिए हैं। ताकि मरीज या उनके रिश्तेदार अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके सीधे फार्मेसी की वेबसाइट पर पहुंच सकेंगे और खरीदी जा रही दवा का असल खरीद व बिक्री रेट मौके पर ही चेक कर सकेंगे। यूपी में 1 नवंबर से ये व्यवस्था लागू करने की तैयारी है।

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