
Dhirendra Shastri’s Remark Controversy : हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग करने वाले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री अब भगवान श्रीकृष्ण के खिलाफ विवादित टिप्पणी करके सुर्खियों में है। धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें भगवान कृष्ण को टेढ़ा और प्रभु राम को सीधा बताया। इसके साथ ही भगवान विष्णु के दोनों अवतारों की तुलना भी कर डाली। जिसको लेकर उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के शिवपुरी में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने प्रभु राम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना कर दी। उन्होंने भगवान राम को अपना और कृष्ण को अन्य भक्तों का बता दिया। यही नहीं उन्होंने बांसुरी बजाने और धनुष चलाने से लेकर पर्वत उठाने समेत तमाम लीलाओं का जिक्र करते हुए दोनों अवतारों की तुलना की। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि हम ठाकुर जी के विरोधी हैं। हम उनके बिल्कुल भी विरोधी नहीं हैं, विनोद की बात आ गई जो हमने कह दिया। लेकिन, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर की टिप्पणी सुर्खियों में है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि हिंदू एकता की बात करने वाले किसी कथावाचक की ऐसी भाषा कितनी उचित है। उन पर प्रभु राम और भगवान कृष्ण की तुलना करने का आरोप लग रहा है।
धीरेन्द्र शास्त्री की इस टिप्पणी का वीडियो शेयर करते हुए सपा और कांग्रेस ने उन पर हमला बोला है। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए कथावाचक के बयान की आलोचना की है। उन्होंने एक लंबे चौड़े पोस्ट में लिखा, “ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक समाचार है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त ‘लघु-बंधु’ बनकर घूम रहा व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का अति निंदनीय कार्य कर रहा है। ये गहरी जाँच का विषय है कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का षड्यंत्र कौन कर रहा है, क्या इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है या आंतरिक, इसकी पड़ताल अपरिहार्य है। हमारे पूज्य अवतारों के बीच नकारात्मक भाव से जानबूझकर अपमानजनक तुलना की जा रही है। एक अवतार के मुक़ाबले दूसरे अवतार को बेहतर बताने की साज़िश सनातन समाज के विरुद्ध चली जा रही बहुत गहरी चाल है। हर सच्चा सनातनी इन दोनों अवतारों का उपासक होता है। नवमी-अष्टमी का भेद किसी के मन में नहीं होता है। इस अवांछित तुलना से सनातन समाज इतना आहत हुआ है कि दोनों अवतारों के नाम का उल्लेख करके हम उसे और आहत नहीं करना चाहते हैं। सनातन समाज के अतिरिक्त भी अन्य समाज और वैश्विक संगठन भी घोर आहत महसूस कर रहे हैं।”
ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक समाचार है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त ‘लघु-बंधु’ बनकर घूम रहा व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का अति निंदनीय कार्य कर रहा है। ये गहरी जाँच का विषय है कि सनातनियों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का षड्यंत्र कौन कर रहा है, क्या इसके पीछे कोई बाहरी शक्ति है या आंतरिक, इसकी पड़ताल अपरिहार्य है।
हमारे पूज्य अवतारों के बीच नकारात्मक भाव से जानबूझकर अपमानजनक तुलना की जा रही है। एक अवतार के मुक़ाबले दूसरे अवतार को बेहतर बताने की साज़िश सनातन समाज के विरुद्ध चली जा रही बहुत गहरी चाल है। हर सच्चा सनातनी इन दोनों अवतारों का उपासक होता है। नवमी-अष्टमी का भेद किसी के मन में नहीं होता है। इस अवांछित तुलना से सनातन समाज इतना आहत हुआ है कि दोनों अवतारों के नाम का उल्लेख करके हम उसे और आहत नहीं करना चाहते हैं। सनातन समाज के अतिरिक्त भी अन्य समाज और वैश्विक संगठन भी घोर आहत महसूस कर रहे हैं।
‘लोकरक्षक’ और ‘लोकरंजक’ दोनों ही एक ही के अवतार हैं, दोनों की लीलाएं अपने समय-काल के अनुरूप घटित हुई हैं फिर ऐसी गरिमाहीन तुलना का तर्क क्या है और उसके पीछे क्या मंसूबा है ये स्पष्ट किया जाए।
ईशनिंदा का अपराध करनेवाले ऐसे व्यक्ति के पीछे, उसके किसी संगी-साथी की कुटिल मंशा कार्यरत दिखती है। ऐसे निंदात्मक विषय पर तो हर राजनीतिक दल और उसके समर्थक भी इस तथाकथित वाचक के विरुद्ध एकजुट हो गये हैं। अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे समाज में अशांति और असंतोष का वैमनस्यकारी वातावरण बनेगा। ये अक्षम्य पाप है, ऐसे व्यक्ति को समाज, सनातन, देश हित में निरुद्ध-अवरुद्ध करना ही एकमात्र उपाय है।
पूजनीय देवी अहिल्याबाई होल्कर जी की मूर्ति का अपमान, मणिकर्णिका घाट का तोड़ा जाना, जगह-जगह मंदिरों को तोड़ना; परमपूज्य शंकारचार्य जी पर निकृष्टतम आरोप लगाना और उनके बटुकों पर प्रहार करना; जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाते हुए तोड़फोड़ करना; ये सब अनायास ही नहीं हो रहा है, इसके पीछे कोई तो है जो इस छल-कुचक्र को रच रहा है। अब वो सब कहाँ हैं जो अपने को सनातन का ठेकेदार मानते हैं, क्या वो अपने परंपरागत भूमिगत निवास में जाकर छिप गये हैं।
हर धर्म-मज़हब-संप्रदाय या उसके आराध्यों-महापुरुषों के प्रति किसी भी प्रकार का विष-वमन कदापि स्वीकार्य नहीं है।
सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई हो।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 2, 2026
ईशनिंदा का अपराध करनेवाले के संगी-साथियों की कुटिल मंशा
यूपी के पूर्व सीएम ने एक्स पोस्ट में कहा, ‘लोकरक्षक’ और ‘लोकरंजक’ दोनों ही एक ही के अवतार हैं, दोनों की लीलाएं अपने समय-काल के अनुरूप घटित हुई हैं फिर ऐसी गरिमाहीन तुलना का तर्क क्या है और उसके पीछे क्या मंसूबा है ये स्पष्ट किया जाए। ईशनिंदा का अपराध करनेवाले ऐसे व्यक्ति के पीछे, उसके किसी संगी-साथी की कुटिल मंशा कार्यरत दिखती है। ऐसे निंदात्मक विषय पर तो हर राजनीतिक दल और उसके समर्थक भी इस तथाकथित वाचक के विरुद्ध एकजुट हो गये हैं। अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे समाज में अशांति और असंतोष का वैमनस्यकारी वातावरण बनेगा। ये अक्षम्य पाप है, ऐसे व्यक्ति को समाज, सनातन, देश हित में निरुद्ध-अवरुद्ध करना ही एकमात्र उपाय है।”
सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई हो
सपा प्रमुख ने आगे कहा, “पूजनीय देवी अहिल्याबाई होल्कर जी की मूर्ति का अपमान, मणिकर्णिका घाट का तोड़ा जाना, जगह-जगह मंदिरों को तोड़ना; परमपूज्य शंकारचार्य जी पर निकृष्टतम आरोप लगाना और उनके बटुकों पर प्रहार करना; जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाते हुए तोड़फोड़ करना; ये सब अनायास ही नहीं हो रहा है, इसके पीछे कोई तो है जो इस छल-कुचक्र को रच रहा है। अब वो सब कहाँ हैं जो अपने को सनातन का ठेकेदार मानते हैं, क्या वो अपने परंपरागत भूमिगत निवास में जाकर छिप गये हैं। हर धर्म-मज़हब-संप्रदाय या उसके आराध्यों-महापुरुषों के प्रति किसी भी प्रकार का विष-वमन कदापि स्वीकार्य नहीं है। सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई हो।”



