
Ram Temple News : अयोध्या में 10वें दीपोत्सव की तैयारियां ज़ोरों पर है और सरकार 30 लाख दीपों के प्रज्ज्वलन का नया रिकॉर्ड बनाने वाली है। लेकिन, इन सबके बीच राम मंदिर की जमीन का मुद्दा एक बार सुर्खियों में है, क्योंकि इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट एक नई याचिका पहुंची है। जिसमें यह पता लगाने की मांग की गयी है कि अयोध्या में राम मंदिर उसी जगह और उसी जमीन पर बना है या नहीं।
दरअसल, 9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जिसके बाद विवादित जगह पर एक ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। जिसके बाद भूमि पूजन के साथ राममंदिर का निर्माण 5 अगस्त 2020 को शुरू हुआ। अब भव्य मंदिर का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने वाला है। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में ‘श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट’ एक याचिका दायर की गई है। जिसमें अयोध्या में राम मंदिर उसी जगह और उसी जमीन पर बना है या नहीं? यह पता लगाने के लिए एक समिति या आयोग बनाने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि 2019 के फैसले में तय की गई जमीन का स्वतंत्र सर्वे या सीमांकन कराया जाए। इसमें उस जमीन की सटीक सीमाएं, निर्देशांक, विस्तार और जगह की पहचान करना शामिल है। कोर्ट जिन्हें उचित समझें वे सर्वे, राजस्व, पुरातत्व और अन्य तकनीकी क्षेत्रों के योग्य विशेषज्ञ शामिल हों। इसके साथ ही लिए कोर्ट से एक स्वतंत्र समिति या आयोग का गठन की मांग भी की गयी है। अगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित जगह और मंदिर की मौजूदा स्थिति के बीच बड़ी विसंगति पाई जाती है, तो अदालत के फैसले का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित किया जाए।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि वर्तमान में बना/विकसित मंदिर, उसी जगह और जमीन पर स्थित है या नहीं, जिस पर इस कोर्ट ने फैसला सुनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद ‘कॉज लिस्ट’ के अनुसार, ‘श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट’ द्वारा दायर इस याचिका पर 2 नवंबर को सुनवाई होगी। यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने होगी।



