
अहमदाबाद। पहले कॉमनवेल्थ कबड्डी चैंपियनशिप 2026 के फाइनल में, भारतीय महिला कबड्डी टीम ने युगांडा को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ ही टीम का अजेय सफर भी जारी रहा। मैच की शुरुआत से ही भारत का दबदबा रहा; साक्षी शर्मा ने आक्रमण की कमान संभाली, जबकि डिफेंडरों ने युगांडा पर लगातार दबाव बनाए रखा। सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 39-14 की आसान जीत के बाद भारतीय टीम फाइनल में पहुंची थी और खिताबी मुकाबले में भी उसने उसी लय को बरकरार रखा।
शनिवार को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने टॉस जीता और पहले बचाव (डिफेंस) करने का फैसला किया। यह फैसला कारगर रहा और टीम ने जल्द ही 6–2 की बढ़त बना ली। साक्षी ने शानदार शुरुआत करते हुए कुछ अहम रेड पॉइंट्स हासिल किए, जबकि भारतीय डिफेंस ने भी बढ़त को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। युगांडा ने कुछ सफल रेड के जरिए वापसी करने की कोशिश की, लेकिन भारत ने खेल पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। साक्षी लगातार पॉइंट्स जुटाती रहीं, जबकि रितु कुमार और सुमन ने युगांडा के रेडर्स को रोकने के लिए महत्वपूर्ण टैकल किए। जल्द ही भारत ने पहला ‘ऑल-आउट’ करके 17–5 की बढ़त बना ली। साक्षी ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और टीम को हाफ-टाइम तक 22–7 की मजबूत बढ़त दिलाने में मदद की।
दूसरा हाफ धीमी गति से शुरू हुआ, जिसमें दोनों टीमों ने काफी संभलकर खेलने का तरीका अपनाया। युगांडा कुछ अंक जुटाने में कामयाब रहा, लेकिन भारत ने उन्हें फासला कम नहीं करने दिया। कप्तान निधि शर्मा ने ‘करो या मरो’ (डू-ऑर-डाई) रेड में एक अहम अंक हासिल किया, और फिर साक्षी ने एक और रेड में कई अंक जुटाकर भारत की बढ़त बनाए रखी। इसके बाद भारत ने अपनी बढ़त को 30–10 तक पहुंचा दिया। युगांडा को भारत के मजबूत डिफेंस के सामने काफी संघर्ष करना पड़ा और वे खेल में वापसी करने का कोई रास्ता नहीं ढूंढ पाए। रितु ने अपनी टैकलिंग से प्रभावित करना जारी रखा, जबकि साक्षी भारत की ओर से मुख्य आक्रामक खिलाड़ी बनी रहीं। युगांडा की नाकायोंगो शिरात उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से थीं, जो भारतीय डिफेंस को परेशान करने में सफल रहीं।
मैच खत्म होने में बस कुछ ही मिनट बचे थे, तब तक भारत ने 33–12 की मजबूत बढ़त बना ली थी। अंत में, भारत ने 35–15 से आसान जीत दर्ज करते हुए ऐतिहासिक खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही भारतीय महिला टीम का शानदार सफर पूरा हुआ, जो पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहीं। भारत की इस सफलता में अनुभवी खिलाड़ियों और नए खिलाड़ियों, दोनों ने अपना योगदान दिया। मेजबान टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का समापन किया।



