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अखिलेश ने गठबंधन में रखने से किया मना तो स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- मैंने उनसे सीट नहीं मांगी

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए विपक्षी इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। एकतरफ जहां सपा और कांग्रेस के बीच खींचतान जारी है तो दूसरी तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल में इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनें अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य सीट को साथ रखने से इंकार कर दिया है। जिस पर मौर्य ने पलटवार किया है।

दरअसल, लखनऊ में शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पूर्व सीएम अखिलेश यादव से जब स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो वह नाराज हो गए। उन्होंने कहा, ‘हमारी सीटों में शामिल नहीं हो सकते। अवॉयड करो, इग्नोर करो।’ उनकी इस टिप्पणी पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में कड़ी प्रतिक्रिया दी। मौर्य ने कहा, “पहली बात तो वो (सपा) इंडिया गठबंधन के एक पार्टी हैं, अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन नहीं हैं… इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय संयोजक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी हैं। अंतिम निर्णय उनका होता है… ये कौन होते हैं हमको सर्टिफिकेट देने वाले और इनके कोटे सीट में मैंने टिकट मांगा ही नहीं.. हम कांग्रेस से बात किए… हमारी बात राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गौतम जी से हुई है।”

सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौर्य ने आगे कहा, “अगर ये इतने ही लायक होते तो मैं उत्तर प्रदेश में रहकर इनसे बात करता, मुझे राहुल जी से बात करने का औचित्य क्या था?… ये पीडीए के दुश्मन नंबर एक हैं, ये हमें और चंद्रशेखर आजाद को नहीं चाहते तो किसको चाहते हैं- नाथवानी (धनराज परिमल नथवानी) को। राज्यसभा में आजम खान की पत्नी को होना चाहिए था, जब वो आजम खान के नहीं हुए तो स्वामी प्रसाद मौर्य के क्या होंगे…।”

गौरतलब है कि यूपी के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने 3 अक्टूबर को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात की थी। जिसके बाद उन्होंने ‘अपनी जनता पार्टी’ के विपक्षी इंडिया गठबंधन में शामिल होने का ऐलान किया था और सीटों को लेकर बाद में चर्चा की बात कही थी। मौर्य ने राहुल गांधी को देश का अगला प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा भी जताई थी। इससे पहले मौर्य ने सपा के नेतृत्व पर समाजवादी विचारधारा से भटकने और उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था।

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