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क्या UGC रेगुलेशंस 2026 पर सरकार लेगी यूटर्न? SC में केंद्र ने कहा- पुनर्विचार के लिए बना रहे विशेष कमेटी

नई दिल्ली। यूजीसी की जनवरी 2026 में जारी किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम काफी विवादों में रहे हैं। सवर्ण समाज ने इसके दुरुपयोग की आशंका जतायी थी और इसे वापस लेने की मांग की थी। जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। अब इस मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार पुनर्विचार के लिए तैयार है। इसके लिए एक विशेष कमेटी बनाने की तैयारी चल रही हैं।

दरअसल, यूजीसी रेगुलेशंस 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले UGC के 2026 के नियमों की फिर से समीक्षा करने के लिए एक विशेष समिति बना रहा है। कोर्ट ने जनवरी में इन नियमों के लागू होने पर रोक लगा दी थी। सॉलिसिटर जनरल (SGI) तुषार मेहता ने भारत के CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को दूर करने के तरीके तलाश रही है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस ढांचे के तहत किसी भी समूह को ऐसा न लगे कि उसे बाहर रखा गया है, या वह खतरे में है, या उसे किसी बात का डर है।

CJI ने कहा कि इस प्रक्रिया में सभी छात्रों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवा पीढ़ी की चिंताओं और उनके भले को सबसे अहम माना जाना चाहिए। इससे पहले, कोर्ट ने 2026 के नियमों पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उसे लगा था कि इनके प्रावधान अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि जब तक इस पर आगे कोई फैसला नहीं लिया जाता, तब तक UGC के 2012 के समानता नियम लागू रहेंगे।

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