
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने ‘अग्निपथ’ योजना पर मिली प्रतिक्रिया के बाद बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने बाकी 75% अग्निवीरों के कार्यकाल को दो साल और बढ़ाने की घोषणा की है। सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम ने कहा कि इस विस्तारित अवधि के बाद, इन सभी को नियमित भर्ती का मौका दिया जाएगा। उन्होंने अग्निवीरों के लिए भर्ती परीक्षाओं और कौशल प्रमाणपत्रों (स्किल सर्टिफिकेट) में भी बदलाव की घोषणा की है।
कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमण्यम ने घोषणा की कि सरकार ने अग्निवीरों की सेवा अवधि को दो साल और बढ़ाने का फैसला किया है। इससे सभी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में स्थायी रूप से शामिल होने का रास्ता मिल सकेगा। अग्निपथ योजना पर मिले फीडबैक के बाद, इस नई व्यवस्था के तहत उन 75% अग्निवीरों को, जिन्हें 25% के स्थायी होने के बाद सेवा से मुक्त किया जाना था, अब दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा। पहले बैच के लगभग 18,000 अग्निवीरों का अपना शुरुआती कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा होने वाला था, जिसके बाद उन्हें सेवा से बाहर होना था।
सीडीएस ने यह भी कहा कि दो साल की विस्तारित अवधि पूरी होने के बाद भी, इन 75% अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में नियमित सैनिकों के रूप में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। चयन योग्यता (मेरिट) के आधार पर होगा। यह घोषणा मूल चार साल के सेवा ढांचे में एक बदलाव को दर्शाती है। बता दें कि मूल अग्निपथ योजना के तहत, अग्निवीर चार साल तक सेवा देते हैं, जिसके बाद योग्यता और संगठन की जरूरतों के आधार पर हर बैच के 25% लोगों को नियमित कैडर में रखा जा सकता है। बाकी 75% लोगों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद सशस्त्र बलों से बाहर हो जाएं।
हालांकि, इस योजना पर मिली प्रतिक्रिया के बाद, सरकार ने इस बचे हुए समूह को दो साल की अतिरिक्त सेवा अवधि देने का फैसला किया है। सीडीएस ने कहा कि इस विस्तारित सेवा से अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में अपना करियर जारी रखने का एक और मौका मिलेगा। सीडीएस एनएस राजा सुब्रमण्यम ने घोषणा की कि दो साल का कार्यकाल पाने वाले अग्निवीरों को उनके प्रदर्शन के मूल्यांकन के आधार पर स्थायी पद दिए जा सकते हैं।



