
लखनऊ। UPFSDA ने प्रदेश में असुरक्षित बोतलबंद और पैक्ड पीने का पानी बेच रही इकाइयों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। विशेष जांच अभियान के दौरान लिए गए 242 नमूनों की लैब जांच में 146 नमूने अधोमानक और 57 नमूनों के माइक्रोबायोलॉजिकल जांच में असुरक्षित पाये गए। जिसके बाद UPFSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने आदेश जारी कर असुरक्षित नमूनों से जुड़ी निर्माण इकाइयों के खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और उनका उत्पादन तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए हैं।
UPFSDA ने अधोमानक नमूने मिलने वाली इकाइयों को सुधार नोटिस जारी कर कमियों को दूर करने और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। वहीं, प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक इकाई के मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने निदेश दिए हैं। प्रदेश के 39 जिलों से ये नमूने लिए गए थे। जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिन इलाकों के पानी के असुरक्षित नमूने मिले हैं, उन्हें जरूरी सुधार करने होंगे और टेस्ट ऑफ स्कीम के तहत उत्पाद के पांच बैचों की जांच करानी होगी। हर बैच में 1000 बोतलें शामिल होंगी। अगर जांच में नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं तो ही उत्पादन दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जाएगा।
जांच में जिन इकाइयों के अधोमानक नमूने मिले हैं, उन्हें कमियां दूर करने के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने का प्रावधान है। उन्हें नमूने अधोमानक मिलने के कारणों को दूर करने के साथ ही टेस्ट ऑफ स्कीम के तहत तीन बैचों के नमूनों की जांच कराकर गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करना होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कमियां दूर होने के बाद संबंधित मंडल के सहायक आयुक्त (खाद्य) मौके पर जाकर सुधार का भौतिक सत्यापन करेंगे और इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे। निर्धारित अवसर दिए जाने के बावजूद सुधार नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



