
Health News : ‘द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ’ जर्नल में छपी नई रिसर्च के मुताबिक, दुनिया में चबाने वाले तंबाकू से जुड़ी सेहत संबंधी समस्याओं का 90% बोझ जिन देशों पर है, उनमें भारत भी शामिल है और दक्षिण एशिया चबाने वाले तंबाकू का “केंद्र” है।
रिसर्च करने वालों का अनुमान है कि 2023 में दुनिया भर में चबाने वाले तंबाकू की वजह से 2,51,000 लोगों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में 241 मिलियन लोग चबाने वाले तंबाकू का इस्तेमाल करते थे, और 60 से 64 साल की उम्र के लोगों में इसका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा था।
टीम ने बताया कि यह एनालिसिस ‘ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिज़ीज़ स्टडी 2023’ (GBD 2023) का हिस्सा है और इसमें 1990 से 2023 तक के 204 देशों और इलाकों को शामिल किया गया है। यह स्टडी चबाने वाले तंबाकू से होने वाले नुकसान को बिना धुएं वाले तंबाकू के दूसरे रूपों से होने वाले नुकसान से अलग करके दिखाती है।
IHME की मुख्य लेखिका और रिसर्च साइंटिस्ट गैब्रिएला गिल ने कहा, “तंबाकू चबाना कोई एक जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या नहीं है, और हमारे नतीजों से पता चलता है कि बहुत कम देशों पर ही इसके स्वास्थ्य संबंधी बोझ का सबसे बड़ा हिस्सा है।”
दक्षिण एशिया में चबाने वाले तंबाकू से जुड़ी अनुमानित 210,000 मौतें हुईं, जो दुनिया भर में हुई कुल मौतों का लगभग 84% है। 2023 में इस क्षेत्र में 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लगभग 15% लोगों ने चबाने वाले तंबाकू का इस्तेमाल किया। उम्र के हिसाब से सबसे ज़्यादा इस्तेमाल इन जगहों पर देखा गया:
पलाऊ: 24.4%
बांग्लादेश: 23.4%
नेपाल: 17.5%
भारत में चबाने वाले तंबाकू से होने वाली मौतों की संख्या पुरुषों और महिलाओं, दोनों में सबसे ज़्यादा दर्ज की गई।



