स्वास्थ्य

अपनी हेल्थ को लेकर AI से पूछते हैं सवाल? कहीं आप भी डिप्रेशन के शिकार तो नहीं

Mental Health and AI : आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग तकनीक पर पूरी तरह निर्भर हो गए हैं और एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने इस तीव्र गति प्रदान की है। जहां लोग अपने विवेक का इस्तेमाल करने की बजाय हर काम एआई से पूछकर करने को ज्यादा समझदारी भरा मानने लगे हैं। लेकिन, कुछ लोग इस पर पूरी तरह निर्भर हो गए, जो अपनी हेल्थ से जुड़े सवाल भी एआई से ही पूछते हैं ये सोच डिप्रेशन की ओर भी इशारा करती है।

दरअसल, एक स्टडी में एआई का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए चौंकाने वाली बात सामने आयी है। जिसमें कहा गया है कि स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के लिए AI का इस्तेमाल करने वाले युवा वयस्कों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण दिख सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़्लोरिडा के रिसर्चर युसेन झाई की अगुवाई में हुई एक नई स्टडी के मुताबिक, जो युवा स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के लिए जेनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करते हैं, उनमें गंभीर एंग्जायटी (चिंता) और डिप्रेशन (अवसाद) होने की संभावना उन लोगों की तुलना में ज़्यादा होती है जो स्वास्थ्य संबंधी मामलों के लिए AI टूल का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

जेनरेटिव AI के इस्तेमाल और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध की जांच करने वाली अमेरिका की शुरुआती बड़ी स्टडीज़ में से एक इस स्टडी में लगभग 1,00,000 युवाओं के डेटा का विश्लेषण किया गया। रिसर्चर्स ने पाया कि जिन लोगों ने स्वास्थ्य से जुड़े सवालों के लिए ChatGPT या Claude जैसे जेनरेटिव AI टूल का इस्तेमाल करने की बात कही, उनमें गंभीर एंग्जायटी और डिप्रेशन की स्क्रीनिंग पॉज़िटिव आने की संभावना क्रमशः 52% और 46% ज़्यादा थी।

नतीजों से इन दोनों व्यवहारों के बीच संबंध का पता चलता है। इनसे यह साबित नहीं होता कि जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करने से एंग्जायटी या डिप्रेशन होता है, या यह कि एंग्जायटी या डिप्रेशन वाले लोग हेल्थ से जुड़े सवालों के लिए AI का इस्तेमाल ज़्यादा करते हैं। UF कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ज़ाई (Ph.D.) ने कहा कि उन्हें ये नतीजे दिलचस्प लगे, क्योंकि शिक्षा में AI को लेकर चिंताएँ अक्सर इस बात पर केंद्रित होती हैं कि छात्र असाइनमेंट और प्रोडक्टिविटी के लिए इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं। उनकी रिसर्च AI, मेंटल हेल्थ और उन तरीकों पर केंद्रित है जिनसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मेंटल हेल्थ से जुड़े जोखिमों की पहचान करने और उन्हें दूर करने के लिए किया जा सकता है।

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