
RSMT में एमबीए एवं एमसीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का चौथा दिन
वाराणसी : राजर्षि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (आरएसएमटी) में एमबीए एवं एमसीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम के चौथे दिन डॉ.तनु सिंह, न्यूरो साइकिएट्रिक ने तनाव प्रबंधन पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि आज तेज गति से भागते जीवन में तनाव एक सामान्य समस्या बन गई है, जिसका प्रभाव हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉ.तनु सिंह ने बताया कि तनाव को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सही प्रबंधन के माध्यम से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देकर, हम न केवल अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि अपने चारों ओर के लोगों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित कर सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना न केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन को सुधारता है, बल्कि यह हमारे परिवार, मित्रों और समाज पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। जब हम अपनी मानसिक भलाई का ध्यान रखते हैं, तो हम अधिक खुश और समर्पित होते हैं, जिससे हमारे आस-पास के लोगों को भी प्रेरणा मिलती है।
डॉ. तनु सिंह विद्यार्थियों में आत्मविश्वास के महत्त्व पर बात की। आत्मविश्वास को अपने क्षमताओं और योग्यता पर विश्वास के रूप में परिभाषित किया। यह न केवल व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि सामाजिक और पेशेवर जीवन में भी सफलता की कुंजी है। विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आत्मविश्वास केवल एक गुण नहीं है, बल्कि यह सफलता की यात्रा में एक अनिवार्य साथी है। इसे विकसित करने से न केवल वे अपने करियर में आगे बढ़ सकते हैं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी संतोष और खुशी पा सकते हैं। आत्मविश्वास के साथ, जीवन की चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाता है।

प्रोफेसए एके त्रिपाठी, कम्प्यूटर विज्ञान अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग में उपलब्ध अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की। प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। इसके लिए उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता है, ताकि नई तकनीकों को विकसित किया जा सके और मौजूदा चुनौतियों का समाधान किया जा सके।प्रोफेसर त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में संभावनाएँ अनंत हैं, लेकिन इन्हें समझदारी और जिम्मेदारी के साथ संभालना जरूरी है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने एआई और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में अनंत संभावनाओं की ओर इशारा करते हुए बताया कि इन तकनीकों का सही उपयोग समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है
प्रोफेसर पी. वी. राजीव, प्रबंध अध्ययन संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए आवश्यक सुझाव और तकनीकी पक्ष पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि सफल स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए एक ठोस व्यवसाय योजना का होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। योजना में लक्ष्यों, बाजार विश्लेषण, और वित्तीय अनुशासन को शामिल करना चाहिए। प्रोफेसर राजीव ने यह भी बताया कि तकनीकी नवाचार को अपनाना आवश्यक है। आधुनिक तकनीक, जैसे डेटा एनालिटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, और क्लाउड कंप्यूटिंग, स्टार्ट-अप के विकास में मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्टार्ट-अप के लिए एक मजबूत टीम बनाने पर जोर दिया, जिसमें विविध कौशल और अनुभव वाले सदस्य शामिल हों। उन्होंने कहा कि टीम की एकता और सहयोग से उद्यम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है।

प्रोफेसर राजीव ने वित्तीय सहायता के स्रोतों, जैसे सरकारी योजनाएँ और निवेशक, के बारे में भी जानकारी दी। उनका मानना था कि सही वित्तीय समर्थन और मार्गदर्शन से स्टार्ट-अप को अपने लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलती है। अशिकाविन इंटरप्राइजेज के आशीष सिंह ने व्यापर जगत के व्यावहारिक पक्ष पर बात की। उन्होंने कहा कि व्यवसाय के लिए बाजार की सही पहचान और ग्राहक की आवश्यकताओं को समझना आवश्यक है। जोखिमों का आकलन करना और उन्हें प्रबंधित करना सफलता की कुंजी है। उन्होंने यह भी बताया कि व्यापार में निरंतर सीखना और विकास आवश्यक है। जो व्यक्ति सीखने के प्रति खुला रहता है, वह बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुकूल अधिक आसानी से ढल सकता है।

वीजीएम सिक्योरिटीज के मृत्युंजय सिंह ने उद्यमिता में नवाचार पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने बताया कि आज तेजी से बदलते व्यावसायिक वातावरण में नवाचार की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उद्यमिता में सफल होने के लिए नई सोच और रचनात्मकता को अपनाना आवश्यक है।मृत्युंजय सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि नवाचार केवल उत्पादों या सेवाओं में नहीं, बल्कि व्यवसाय के सभी पहलुओं में हो सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनियों को अपने संचालन, विपणन रणनीतियों, और ग्राहक सेवा में भी नवाचार को शामिल करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह सुझाव दिया कि उद्यमियों को जोखिम उठाने और असफलताओं से सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक सफल उद्यमिता की कुंजी लगातार सीखना और विकसित होना है। स्वागत निदेशक डॉ अमन गुप्ता ने किया। सञ्चालन डॉ संजय कुमार सिंह, और डॉ विनीता कालरा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पी एन सिंह, और सुजीत सिंह ने किया।