
लखनऊ : रामलला 500 वर्षों के बाद 22 जनवरी को अपने स्वयं के मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। इससे पहले प्रदेश में 3 से 6 साल के बच्चों को मिड डे मील की तर्ज पर गर्म बना हुआ भोजन परोसने के कार्य का शुभारंभ अयोध्या से होना अत्यंत ही शुभ कार्य है। सुपोषित और स्वस्थ बच्चे ही सशक्त भारत का आधार बनेंगे। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अयोध्या के पुलिस लाइन स्थित कंपोजिट विद्यालय से हॉट कुक्ड मील योजना का शुभारंभ करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने 403 करोड़ की लागत से 35 जनपदों में 3401 आंगनवाड़ी केंद्रों का शिलान्यास किया। साथ ही अयोध्या रिजर्व पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल का भी लोकार्पण किया।
अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि मिड डे मील की तर्ज पर गर्म बना हुआ भोजन अलग अलग मेन्यू के आधार पर अलग अलग दिन परोसने की ये योजना विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इन्सेफेलाइटिस का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरविभागीय समन्वय के चलते जो बीमारी 40 साल में 50 हजार बच्चों को निगल गई उसे हमने चार साल में नियंत्रित कर लिया। इसलिए ये जरूरी हो जाता है कि अंतरविभागीय समन्वय से योजनाओं पर कार्य हो तो बेहतर परिणाम आ सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें दो करोड़ से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हैं। इनमें 6 प्रकार की सेवाएं प्रदान की जाती हैं। पहली बार प्रदेश में हो रहा है कि 3 से 6 साल के 80 लाख बच्चों को हॉट कुक्ड मील प्रदान करने के कार्य का शुभारंभ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। आप सौभाग्यशाली हैं, क्योंकि कान्हा को द्वापर युग में यशोदा मइया ने बचपन में पाला था, मगर आप सैकड़ों कान्हाओं की सेवा करने, उनके पोषण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही सशक्त भारत की आधारशिला को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही हैं। ये आपका सौभाग्य है कि आपको यह अवसर मिला है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले पोषाहार की योजनाओं पर बहुत से प्रश्न खड़े होते थे। मगर, बीते 6-7 साल में काफी सुधार हुआ है। बच्चों में एनीमिया के स्तर में सुधार हुआ है, अल्प वजन, लंबाई और वजन के मामलों में काफी सुधार देखने को मिला है। शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। इसमें अभी काफी सुधार की गुंजाइश है, इसके लिए हमें निरंतर कार्य करना होगा। स्वस्थ बालक केवल महिला बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पंचायती राज और नगर विकास विभाग को भी इससे जुड़ना चाहिए।