
रिपोर्ट / तान्या कसौधन
तिरुपति बालाजी मंदिर प्रसादम में जानवरों की चर्बी मिलाये जाने वाला विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इस विवाद पर पक्ष-विपक्ष लगातार अपना बयान दे रहा है. मंदिर में लड्डू की जांच में जानवरों की चर्बी और मछली का तेल मिलाने की पुष्टि होने के बाद धार्मिक संगठन और साधु संत काफी आक्रोशित है.
लखनऊ में होगी जाँच
अब इस मामले को लेकर खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन भी एक्शन में आ गया हैं. विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार राजधानी लखनऊ के सभी प्रसिद्ध मंदिरों व धार्मिक स्थलों के बाहर बिक रहे प्रसाद की जांच की मांग हो रही है.
दरअसल तिरुपति बालाजी मंदिर के भोग की रिपोर्ट के बाद यूपी में भी प्रशासन अलर्ट पर है.खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन का कहना है, “देश के तमाम शहरों व प्रमुख धार्मिक स्थलों के बाहर बिकने वाले प्रसाद की जांच की जाएगी”. इसके साथ ही दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने लगाएं आरोप
वही, इस विवाद की शुरुआत की बात करें तो मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने एक बयान में YSRCP सरकार पर प्रसाद में घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. तिरुपति बालाजी मंदिर प्रसादम में जानवरों की चर्बी व मछली के तेल का इस्तेमाल किए जाने की बात कही थी, इसके बाद से ही यह मुद्दा अब राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. इसने हिन्दुओं की आस्था पर भी तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं.
सरकार ने किया वादा
इसी के साथ जगनमोहन रेड्डी ने इस बात को पूरी तरह से नाकार दिया हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने भी आंध्र प्रदेश सरकार से तिरुपति मंदिर के प्रसाद को लेकर हुए विवाद पर रिपोर्ट मांगी है और जांच के बाद उचित कार्यवाही का वादा किया है.