उत्तर प्रदेशलखनऊ

तकनीकी प्रगति के चलते बैंकों को सिस्टम अपडेट करने की आवश्यकता

RSMT में एमबीए एवं एमसीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का दूसरा दिन

वाराणसी : राजर्षि स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (आरएसएमटी) में एमबीए एवं एमसीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम के दूसरे दिन अनुराग श्रीवास्तव, शाखा परिचालन प्रमुख, एचडीएफसी बैंक ने बैंकिंग क्षेत्र में वर्तमान चुनौतियों और रोजगारपरकता पर गहन विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि आज के तेजी से बदलते वित्तीय परिदृश्य में बैंकों को कई महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी प्रगति के चलते बैंकों को अपने सिस्टम को अपडेट करने की आवश्यकता है। मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक सेवाओं को चुनौती दी है। नए-नए फिनटेक स्टार्टअप्स और डिजिटल प्लेटफार्मों की संख्या में वृद्धि हो रही है, जिससे प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है। यह ग्राहकों के लिए बेहतर सेवाओं और दरों का सामना करता है। डिजिटल ट्रांजैक्शनों की बढ़ती संख्या ने साइबर सुरक्षा के खतरों को भी बढ़ा दिया है। बैंकों को अपने डेटा और ग्राहकों की जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ हैं, जैसे कि रिसर्च एनालिस्ट, रिलेशनशिप मैनेजर, और फाइनेंशियल एनालिस्ट। ये सभी भूमिकाएँ नए पेशेवरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।

वरुण उपाध्याय, डीजीएम, प्रिज्म जॉनसन सीमेंट ने सीमेंट उद्योग में सामने आ रही चुनौतियों और रोजगार के अवसरों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के अनेक अवसर भी प्रदान करता है। अमित मिश्रा, आरटीएम, प्रिज्म जॉनसन सीमेंट ने आवश्यक मौलिक कौशल पर चर्चा की, जो आज के प्रतिस्पर्धात्मक कार्य वातावरण में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझना और उनके साथ प्रभावी संवाद करना एक महत्वपूर्ण कौशल है। संजीव कुमार सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रिज्म जॉनसन सीमेंट ने नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को अभिप्रेरित किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत निदेशक प्रो.अमन गुप्ता ने किया। मानव मूल्य पर डॉ सीपी सिंह ने विचार रखे। सत्र का सञ्चालन डॉ शैलेन्द्र तिवारी ने किया। प्रश्नोत्तरी सत्र का संचालन आशुतोष श्रीवास्तव और विजय पांडेय ने किया। कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ गरिमा आनंद ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनीता कालरा ने किया।

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